इंडोनेशिया और भारत के बीच फिर से मजबूत संबंधों की बुनियाद रखेंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले इंडोनेशिया दौरे की शुरुआत हो चुकी है। इससे पहले इंडोनेशियाई राष्ट्रपति जोकोवो विडोडो ने 2016 और फिर जनवरी, 2018 में भारत-आसियान शिखर सम्मेलन के लिए भारत का दौरा किया। हाल में जर्मन, चीनी और रूसी नेताओं के बाद पीएम मोदी अब राष्ट्रपति विडोडो से मिलेंगे। वर्ष 2014 में म्यांमार में आयोजित पूर्वी एशियाई सम्मेलन में पहली बार मुलाकात के बाद दोनों नेता हर साल एक बार मिलते हैं। उसी साल दोनों चुनाव जीतकर सत्ता में आए थे।

भारत और इंडोनेशिया दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले देश हैं जो युवा, आकांक्षी और विकास को लेकर प्रतिबद्ध हैं। दोनों देश जी-20, नैम, ईएएस, आइओआरए, एआइआइबी और ऐसे ही कई समूहों के सदस्य हैं। इन समानताओं और भारत के अंडमान एवं इंडोनेशिया के असेह द्वीप के बीच अपेक्षाकृत कम दूरी के बावजूद रिश्ते वैसे परवान नहीं चढ़े। दोनों देशों की हजारों वर्ष प्राचीन विरासत, संस्कृति और व्यापारिक संपर्क हैं।

इंडोनेशिया र्में हिंदू, बौद्ध और इस्लाम का प्रसार भारत के माध्यम से ही हुआ। योग्यकार्ता में प्रम्बानर्न हिंदू मंदिर और बोरोबुदूर बौद्ध मंदिर और रामायण एवं महाभारत का प्रभाव इस पुराने जुड़ाव के चिन्ह हैं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी भारत और इंडोनेशिया एक दूसरे के करीबी रहे। 1950 में गणतंत्र दिवस की पहली परेड में राष्ट्रपति सुकर्णो ही मुख्य अतिथि थे। फिर 1970 के दशक में संबंधों में कुछ दुराव आया जो 1990 के दशक के अंत तक इंडोनेशिया में लोकतंत्र की पुर्नस्‍थापना तक जारी रहा। उसके बाद से संबंधों में कुछ सुधार आया है।

संरक्षणवाद की चुनौती झेल रही दुनिया में भारत और इंडोनेशिया अपनी परस्पर आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ क्षेत्रीय एवं वैश्विक एजेंडे को सिरे चढ़ाने में मिलकर काफी कुछ कर सकते हैं। 2011 में भारत और इंडोनेशिया रणनीतिक साझेदार बने जिसमें सहयोग के लिए तमाम बिंदुओं को शामिल तो किया गया, लेकिन उन्हें पूरी तरह अमली जामा नहीं पहनाया गया। ऐसे में उन पहलुओं से निजात पाने की दरकार है जो संबंधों में अपेक्षित तेजी की राह में अवरोध बने हुए हैं। रणनीतिक साझेदारी को सिरे चढ़ाने के लिए कुछ अहम पहलुओं पर विचार करना होगा। अरसे से लंबित कुछ द्विपक्षीय वार्ताओं ने पिछले साल ही तेजी पकड़ी है। उन्हें लेकर प्राथमिकता सूची तैयार करने के साथ ही हमें तुरंत फैसले लागू करने चाहिए।

सामुद्रिक सुरक्षा, सतत विकास जैसे तमाम क्षेत्रीय एवं वैश्विक महत्व के मुद्दों पर गहन चर्चा हमें करीब लाएगी। चीन और बीआरआइ को लेकर इंडोनेशिया का नजरिया हमसे कुछ अलग है और दक्षिण चीन सागर को लेकर भी वह मुखर नहींर्। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की चार देशों को लेकर बन रही संभावित चौकड़ी को लेकर वह कुछ सशंकित हो सकता है, लेकिन वह सामुद्रिक सुरक्षा को संतुलन देने में भारत के महत्व को भी बखूबी समझता है। इंडियन ओशन रिम्स एसोसिएशन में वह भारत का पूरा समर्थन और इस्लामिक देशों के संगठन में भारत विरोधी अभियान का विरोध करता है। यह वक्त का तकाजा है कि हम साझा महत्व के मुद्दों को केंद्र में रखकर सार्थक चर्चा के माध्यम से भरोसे के उच्च स्तर को कायम करें। इधर रक्षा, सामुद्रिक सहयोग और अंडमान एवं मलक्का जलडमरूमध्य के बीच अभ्यास और गश्त बढ़ी है।

भारतीय नौसेना एवं तटरक्षक दल और इंडोनेशियाई नौसेना के बीच भी सहयोग बढ़ा है। हम इंडोनेशिया को रक्षा उपकरणों की आपूर्ति के साथ ही वहां उनके संयुक्त उत्पादन के लिए शोध एवं विकास की संभावनाएं तलाश सकते हैं। भारत सुमात्रा के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह में भी निवेश कर सकता है। यह नौसेना के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। इसे आसियान इन्फ्रास्ट्रक्चर योजना के तहत मूर्त रूप दिया जा सकता है। एशिया अफ्रीका गलियारे के माध्यम से इसे जापानी और अन्य स्रोतों से वित्तीय मदद मिल सकती है।

भारत के लिए व्यापार के मोर्चे पर कटौती संभव नहीं होगी, क्योंकि वह इंडोनेशिया से बड़ी तादाद में कोयला और पाम ऑयल आयात करता है। इससे व्यापार में पलड़ा इंडोनेशिया की ओर झुका रहता है। यह झुकाव और बढ़ेगा, क्योंकि तकरीबन पांच लाख भारतीय सैलानी इंडोनेशिया जाते हैं। भारत में इंडोनेशियाई निवेश से इसकी भरपाई की जा सकती है। तेजी से बढ़ते इंडोनेशियाई बाजार के लिए बुनियादी ढांचे, बिजली, खनन और स्वास्थ्य जैसी अन्य सेवाओं के लिए भारतीय उद्यमियों के साथ जुगलबंदी इस मामले में फायदेमंद होगी।

भारतीय कारोबारियों की सहूलियत के लिए इंडोनेशिया को त्वरित रूप से फैसले लेने वाली व्यवस्था बनानी चाहिए ताकि उन्हें वहां अपने व्यावसायिक हित सुरक्षित नजर आएं। अधिकांश भारतीय कंपनियों को लगता है कि इंडोनेशिया में चीनी कंपनियों को तरजीह दी जाती है। ऐसे में इंडोनेशिया को भारत के साथ मेलजोल बढ़ाना होगा। यदि हवाई अड्डे, बंदरगाह, अस्पताल, बिजली संयंत्र और खनन जैसे पांच बुनियादी ढांचागत क्षेत्रों में काम तेजी से जोर पकड़ता है तो इसके दूरगामी प्रभाव होंगे।

बेहतर होगा कि इंडोनेशिया मेक इन इंडिया के तहत कम से कम पांच निवेश प्रस्तावों पर कदम आगे बढ़ाए। पाम ऑयल, खाद्य प्रसंस्करण, सड़क और राजमार्गों जैसे क्षेत्रों में इसे बढ़ाया जा सकता है। मांस के अतिरिक्त दवा, चावल, चीनी और बुनियादी ढांचा उपकरणों के लिए भी इंडोनेशिया को भारत के लिए दरवाजे खोलने चाहिए। इंडोनेशिया के लिए पाम ऑयल और कोयला बेहद महत्वपूर्ण हैं और भारत उसे लंबी अवधि के अनुबंध का आश्वासन दे सकता है। इससे बाजार में बेहतर हालात बनेंगे, कीमतों को लेकर भी स्थिरता रहेगी। इसके लिए दोनों देश तार्किक शुल्क ढांचा बना सकते हैं।

मानव संसाधन और शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी कुछ किए जाने की गुंजाइश है। दोनों देश मुख्य रूप से युवा आबादी वाले हैं जहां उन्हें बेहतर शिक्षा और अवसरों की आवश्यकता है। अधिकांश इंडोनेशियाई छात्र भारत में मजहबी तालीम के लिए आते हैं, जबकि भारत से इक्का-दुक्का छात्र ही वहां जाते हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों को साझा योजनाओं, संकायों और छात्रों के आपसी विनिमय की जरूरत है। सांस्कृतिक, मानविकी, प्रबंधन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सभी में इसे बढ़ाना चाहिए। साथ ही साझा सांस्कृतिक विरासत को भी समय के साथ सहेजना होगा।

इसके तहत साझा पुरातात्विक परियोजनाएं शुरू की जा सकती हैं। नियमित रूप से आयोजित रामायण महोत्सव से कला एवं नृत्य के क्षेत्र में विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही नहदलाला उलमा और मुहम्मदिया जैसे मुख्यधारा के मुस्लिम संगठनों के साथ भी सक्रियता से काम करने की जरूरत है, क्योंकि वे चरमपंथ के खिलाफ सबसे कारगर जरिया साबित हो सकते हैं। एक बहुलतावादी लोकतंत्र के रूप में हमें इंडोनेशिया के समक्ष भारत की तरक्की की तस्वीर दिखाकर युवाओं को शिक्षा और कौशल विकास की राह से जोड़ना होगा। भारतवंशियों के माध्यम से और इस तरह की नागरिक समाज सहभागिता के जरिये उन उम्मीदों और आशाओं को नए पंख लगेंगे जिनकी प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से अपेक्षा की जा रही है।

One thought on “इंडोनेशिया और भारत के बीच फिर से मजबूत संबंधों की बुनियाद रखेंगे पीएम मोदी

  • जून 4, 2018 at 12:25 अपराह्न
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    may this kind of meeting help both countries to help and change their lives

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