दांव पर सियासी साख, उपचुनाव के नतीजे तय करेंगे भाजपा व विपक्ष के भविष्य की रणनीति

कर्नाटक विधानसभा नतीजों के बाद सोमवार को हुए 11 राज्यों की चार लोकसभा और दस विधानसभा सीटों के चुनावों को भाजपा और विपक्षी एकता की सियासी साख का लिटमस टेस्ट माना जा रहा है। पिछले चार साल में हुए अधिकांश लोकसभा उपचुनाव में हारने के चलते भाजपा की सीटें 282 से खिसककर 272 पहुंच गई हैं। अभी इन चारों सीटों पर भाजपा का कब्जा था, ऐसे में दांव पर उसी का सब कुछ है। कर्नाटक जीत से उत्साहित विपक्षी गठबंधन भाजपा को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट पर उसने भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ अपना संयुक्त उम्मीदवार उतारकर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। ऐसे में ये नतीजे भविष्य की सियासी रणनीति को भी तय करेंगे।

कैराना, उत्तर प्रदेश [17 लाख मतदाता]

भाजपा और एकीकृत विपक्ष के लिए यह सीट साख की लड़ाई बन चुकी है। भाजपा सांसद हुकुम सिंह की मौत के बाद खाली हुई थी। भाजपा ने उनकी बेटी मृगांका सिंह को प्रत्याशी बनाया हुआ है जबकि राष्ट्रीय लोकदल की तबस्सुम हसन को कांग्रेस, सपा और बसपा का समर्थन हासिल है। पूर्व में गोरखपुर और फूलपुर सीटें खो चुकी भाजपा इसे जीतकर बदला लेने की कोशिश में है तो 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सपा- बसपा और कांग्रेस का मिलन इसे एक प्रयोग के रूप में देख सकते हैं।

विधानसभा क्षेत्र: इस लोकसभा चुनाव क्षेत्र के तहत पांच विधानसभा चुनाव क्षेत्र (शामली, थाना भवन, कैराना, गंगोह और नाकुर) आते हैं।

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